रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कलह पर फिर बहस छिड़ गई है। सरगुजा के सूरजपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के समर्थकों में ऐसी ठनी है कि कांग्रेस पदाधिकारियों के  इस्तीफों की झड़ी लगी है। कांग्रेस  सफाई दे रही है तो बीजेपी चुटकी ले रही है। दावा है कि तीन दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी इस्तीफादे रहे हैं। इससे पहले भी सरगुजा जिला अध्यक्ष दिल्ली जाकर हाईकमान से शिकायत कर चुके हैं। सरगुजा कांग्रेस में उठापटक का तूफान दिख रहा है। सूरजपुर में एक साथ संयुक्त महामंत्री, महामंत्री, सचिव समेत 17 बड़े चेहरों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दावा है कि इस्तीफा देने वालों की संख्या 30 से ज्यादा है, जिसमें पूर्व मंत्री खेल साय सिंह की बहू भी शामिल हैं। आरोप है कि स्थानीय नेता टीएस सिंहदेव समर्थकों को हाशिए पर रखकर केवल भूपेश बघेल गुट को तरजीह मिलने से आक्रोशित हैं। हालांकि, पूछे जाने पर किसी ने भी साफ-साफ वजह नहीं बताई है। इधर, कांग्रेस जिला पदाधिकारियों का दावा है कि जिला अध्यक्ष या उन्हें इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है, सब कुछ सोशल मीडिया पर ही चल रहा है।
अब तक इस्तीफा की कोई हार्ड कॉपी नहीं मिली-शशि
सूरजपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने कहा है कि उन्हें भी मोबाइल फोन के माध्यम से ही कुछ लोगों का इस्तीफा पत्र दिखाई दिया है, लेकिन उन्हें किसी ने पर्सनल व्हाट्सएप्प नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफा पत्र वायरल होने के बाद संबंधित पदाधिकारी से उन्होंने फोन पर बातचीत की। तब पता चला कि उन्होंने इस्तीफा पत्र में साइन नहीं किया है। यानी उनके नाम पर इस्तीफा पत्र बनाकर दूसरे व्यक्तियों के द्वारा इसे वायरल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों के द्वारा जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई जा रही है, लेकिन जितने लोगों का इस्तीफ ा वाला पत्र उन्हें दिखाई दिया है, वह उन सभी से बात करेंगे। शशि सिंह ने बताया कि उन्हें अब तक इस्तीफा की कोई हार्ड कॉपी नहीं मिली है।
अजीत जोगी की पार्टी में काम करने वाले लोगों को मौका दिया
सूरजपुर जिला कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी से इस्तीफा देने वालों में उपाध्यक्ष के अलावा अन्य कई पद में मनोनीत किए गए नेता शामिल हैं। वायरल इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि सूरजपुर जिला कांग्रेस कमेटी में उन लोगों को शामिल किया गया है, जो आज से पहले दूसरे पार्टियों में हुआ करते थे, लेकिन उन्हें कांग्रेस में मौका दे दिया गया। जिन्होंने कांग्रेस को हराने का काम किया उन्हें पद से नवाजा गया है। इतना ही नहीं यह भी कहा गया है कि अजीत जोगी की पार्टी में काम करने वाले लोगों को कांग्रेस में मौका दिया गया है। बाहर से कांग्रेस के नेताओं को आयातित किया गया है और उनसे बिना सलाह मशविरा लिए कांग्रेस की टीम बनाई गई है। वहीं अन्य इस्तीफा देने वाले कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि अपरिहार्य कारण से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं
कांग्रेस में गुटबाजी नहीं रूक रही
वहीं दूसरी तरफ जिला अध्यक्ष शशि सिंह भूपेश बघेल और अमरजीत भगत के गुट की मानी जाती है और राहुल गांधी की करीबी मानी जाती हैं, क्योंकि उनकी न्याय यात्रा में शामिल हुई थी। वहीं जब कांग्रेस ने उन्हें सरगुजा लोकसभा सीट से चुनाव लडऩे के लिए टिकट दिया था तब भी उनके प्रचार के समय गुटबाजी दिखाई दी थी, इसके बाद शशि सिंह को लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था। अब जब वह जिला अध्यक्ष बन गई हैं तब भी उन्हें पार्टी के भीतर चल रहे खींचतान का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जिला अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं से मुलाकात की थी और आशीर्वाद लिया था। उन्होंने भूपेश बघेल के अलावा पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव से भी मुलाकात की थी. लेकिन शायद इसका कोई असर नहीं हुआ और भीतरखाने में गुटबाजी अभी भी है।