बाजार लगने वाले दिन बड़ी संख्या में दुपहिया वाहन चालक सडक किनारे से लेकर बीच डिवाइडर तक अपने वाहन खड़े कर देते हैं। हालत यह हो जाती है कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि यह पार्किंग स्थल है या यातायात नियंत्रण के लिए बनाया गया डिवाइडर। सडक का बड़ा हिस्सा वाहनों से घिर जाने के कारण आवागमन बाधित होता है। जाम की स्थिति बनती है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नगर निगम ने बाजार क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं। आसपास से अतिक्रमण हटाया गया है और सडक को चैड़ा करने की कोशिश भी की गई है। इसके बावजूद मनमानी पार्किंग पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लग पाई है, न तो नियमित कार्रवाई हो रही है और न ही वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था विकसित की गई है। परिणामस्वरूप, बाजार दिवस पर हर सप्ताह वही समस्या दोहराई जाती है। बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं। पैदल चलने वालों को वाहनों के बीच से निकलना पड़ता है, वहीं चारपहिया वाहनों को लंबा जाम झेलना पड़ता है।
आपातकालीन सेवाओं के लिए भी रास्ता निकालना चुनौती बन जाता है। सवाल यह है कि जब डिवाइडर यातायात को सुचारु बनाने के लिए बनाया गया था, तो उस पर पार्किंग कैसे होने दी जा रही है? क्या निगम सख्त कार्रवाई करेगा? क्या बाजार क्षेत्र के लिए अलग पार्किंग जोन तय होगा? जब तक ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक बुधवारी बाजार में हर सप्ताह यही अव्यवस्था दोहराती रहेगी। शहरवासियों को अब इंतजार है कि आखिर व्यवस्था कब दुरुस्त होगी?





